BEGUSARAI: रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली बहुचर्चित हत्याकांड में बेगूसराय कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए एक पिता को अपने ही पुत्र की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जस्टिस ऋषिकांत की अदालत ने सत्र वाद संख्या 371/2021 (तेघड़ा थाना कांड संख्या 217/2019) में यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
बेगूसराय कोर्ट ने तेघरा थाना अंतर्गत पिढोली वार्ड-03, निवासी स्वर्गीय राम लखन के बेटा सुधीर कुमार को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा के साथ ₹15,000 का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर तीन माह के अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया गया है।
अभियोजन संतोष कुमार के बताया कि 9 जून 2019 की शाम करीब 6:30 से 7 बजे के बीच मृतक आलोक कुमार उर्फ सचिन अपने घर के बाहर बैठकर भूंजा खा रहे थे। इसी दौरान उनके पिता सुधीर कुमार पीछे से आये और तेज धारदार हथियार से उसका गला रेत दिया। अचानक हुए इस हमले में आलोक कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी।
हत्या के पीछे का कारण
बता दें कि मृतक की पत्नी सूचिका आभा देवी द्वारा दर्ज प्राथमिकी में बताया गया कि आरोपी सुधीर कुमार शराब और ताड़ी का आदी था। उसने घटना से एक माह पूर्व एक जमीन बेच दी थी और पूरी रकम नशे में उड़ा दी। इसके बाद वह दूसरी जमीन बेचने की फिराक में था। परिवार, खासकर मृतक आलोक कुमार, इस बात का विरोध कर रहे थे और संभावित खरीदार को भी मना कर दिया था। इसी बात से नाराज होकर आरोपी ने अपने ही पुत्र की हत्या कर दी।
मामले की सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक संतोष कुमार ने अदालत के समक्ष सात गवाह पेश किए। इनमें मृतक की मां नूतन देवी, पत्नी आभा देवी, भाई अनुपम कुमार, पड़ोसी अमित कुमार एवं रणधीर कुमार, चिकित्सक डॉ. राजू तथा अनुसंधानकर्ता सुमंत चौधरी शामिल हैं। सभी गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने 27 अप्रैल 2026 को आरोपी को दोषी करार दिया था।
दोष सिद्ध होने के बाद 29 अप्रैल 2026 को सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने मृतक की पत्नी आभा देवी को मुआवजा दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आवश्यक निर्देश दिए हैं।
दरअसल बेगूसराय का यह मामला बताता है कि नशे और लालच की आग में जब रिश्ते झुलसते हैं, तो अंजाम कितना भयावह हो सकता है। न्यायालय के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे अपराधों के लिए कानून में कोई रियायत नहीं है। यह फैसला न केवल एक जघन्य अपराध पर न्याय की मुहर है, बल्कि समाज में बढ़ती पारिवारिक हिंसा और नशे की प्रवृत्ति पर भी एक सख्त संदेश है।
बेगूसराय से हरेराम दास की रिपोर्ट