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25-Mar-2026 09:17 AM
By First Bihar
Bihar Politics : जनता दल (यूनाइटेड) के बांका से सांसद गिरधारी यादव की लोकसभा सदस्यता पर अब संकट गहराता नजर आ रहा है। पार्टी के भीतर ही उनके खिलाफ आवाज उठने से मामला गंभीर हो गया है। दरअसल, जदयू के ही सांसद और लोकसभा में पार्टी के नेता दिलेश्वर कामत ने लोकसभा अध्यक्ष से गिरधारी यादव के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने उन्हें अयोग्य ठहराने की अपील करते हुए कहा है कि सांसद पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, जो संसदीय आचरण और दलगत अनुशासन के खिलाफ है।
सूत्रों के मुताबिक, जदयू नेतृत्व पहले से ही गिरधारी यादव के बयानों और गतिविधियों को लेकर नाराज रहा है। पिछले वर्ष भी पार्टी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। यह नोटिस उनके उस बयान के बाद दिया गया था, जिसमें उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता करार देते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा था और चेतावनी दी थी कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
गिरधारी यादव ने अपने बयान में कहा था कि अगर लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाता सूची सही थी, तो कुछ ही महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए वह गलत कैसे हो सकती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि क्या वह खुद गलत मतदाता सूची के आधार पर निर्वाचित हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग की टाइमिंग पर भी सवाल खड़े किए थे। उनका कहना था कि बिहार उस समय बाढ़ और कृषि कार्यों की व्यस्तता से जूझ रहा था, ऐसे में मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया को छह महीने पहले ही पूरा कर लिया जाना चाहिए था।
पार्टी ने उनके इस बयान को संवेदनशील मुद्दे पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी बताते हुए कहा था कि जदयू हमेशा चुनाव आयोग के साथ खड़ी रही है। ऐसे में एक सांसद का इस तरह सार्वजनिक रूप से बयान देना पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाता है। हालांकि, उस समय गिरधारी यादव ने अपने रुख पर ज्यादा नरमी नहीं दिखाई थी, जिससे पार्टी और उनके बीच दूरी बढ़ती चली गई।
गिरधारी यादव के खिलाफ असंतोष की एक और वजह उनके पारिवारिक राजनीतिक निर्णय भी रहे हैं। उनके बेटे चाणक्य प्रकाश ने विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर बेलहर सीट से चुनाव लड़ा था। यह सीट जदयू के खाते में थी और पार्टी ने वहां से मनोज यादव को उम्मीदवार बनाया था। ऐसे में एक ही परिवार के अलग-अलग दलों में सक्रिय होने को भी पार्टी ने अनुशासन के खिलाफ माना।
चाणक्य प्रकाश ने वर्ष 2023 में राजनीति में कदम रखा था और उन्होंने विदेश, खासकर लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी की है। हालांकि, विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस घटनाक्रम ने जदयू नेतृत्व को असहज जरूर कर दिया था।
अब दिलेश्वर कामत द्वारा लोकसभा अध्यक्ष से की गई शिकायत के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अगर इस पर औपचारिक कार्रवाई शुरू होती है, तो गिरधारी यादव की सदस्यता पर खतरा और बढ़ सकता है। फिलहाल, पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अंदरखाने इस मुद्दे पर मंथन जारी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर पार्टी अनुशासन के नाम पर कड़ा कदम उठाती है, तो यह आने वाले समय में अन्य नेताओं के लिए भी एक संदेश होगा। वहीं, गिरधारी यादव के लिए यह मामला उनकी राजनीतिक पारी के लिए बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।