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Bihar News : फर्जीवाड़ा पकड़ में आया! बिहार के इस जिले में शिक्षक ने जाली अंक-पत्र से पाई नौकरी; अब निगरानी ने दर्ज कराया केस

बिहार में उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बभनगामा के शिक्षक गजेंद्र प्रसाद मंडल के खिलाफ जाली अंक-पत्र के आधार पर नौकरी पाने का मामला सामने आया। निगरानी विभाग की जांच के बाद बौंसी थाना में केस दर्ज। फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले शिक्षकों के लिए चेताव

19-Mar-2026 02:16 PM

By First Bihar

Bihar News : बिहार में शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की निगरानी जांच (monitoring investigation) के तहत एक और बड़ा मामला सामने आया है। प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बभनगामा में कार्यरत शिक्षक गजेंद्र प्रसाद मंडल के खिलाफ जाली अंक-पत्र के आधार पर नौकरी पाने के आरोप में बुधवार को केस दर्ज किया गया। यह कार्रवाई उच्च न्यायालय पटना द्वारा दायर जनहित याचिका (Public Interest Litigation) के आलोक में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की जा रही जांच का हिस्सा है।


गजेंद्र प्रसाद मंडल का जन्म शंभुगंज प्रखंड में हुआ था और उनके पिता का नाम चुनचुन प्रसाद मंडल है। शिक्षक का नियोजन वर्ष 2008 में शारीरिक शिक्षक (Physical Education Teacher) के रूप में किया गया था। उनके चयन में बीपीईडी (B.P.Ed) के अंक-पत्र को आधार बनाया गया था, जिसके माध्यम से उन्हें प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में नियुक्ति दी गई।


शिक्षक ने अपने चयन के समय उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर (ओडिशा) का अंक-पत्र जमा किया था। हालांकि, जब निगरानी विभाग ने विश्वविद्यालय से अंक-पत्र का सत्यापन कराया, तो विश्वविद्यालय की रिपोर्ट में सामने आया कि गजेंद्र प्रसाद मंडल द्वारा दिखाए गए 605 अंक जाली (fake marks) हैं। इस खुलासे ने पूरे प्रखंड में हड़कंप मचा दिया।


जानकारी के अनुसार, दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट हुआ कि शिक्षक ने उच्च न्यायालय द्वारा दी गई स्वैच्छिक त्यागपत्र की अवधि (voluntary resignation period) के दौरान भी अपना इस्तीफा नहीं सौंपा था। जाली दस्तावेज और प्रमाण पत्र की पुष्टि होने के बाद निगरानी विभाग ने बौंसी थाना में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन किया, और थानाध्यक्ष पंकज कुमार झा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केस दर्ज कर लिया।


इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि गजेंद्र प्रसाद मंडल अब सेवानिवृत्त (retired) हो चुके हैं। बावजूद इसके, 10 साल से चल रही निगरानी जांच पूरी हुई और शिक्षक के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी गई। इस कार्रवाई के बाद न केवल बौंसी इलाके में बल्कि पूरे प्रखंड के शिक्षा क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। खासकर उन शिक्षकों के लिए यह चेतावनी स्वरूप है, जो जाली प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे हैं।


निगरानी जांच के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई केवल गजेंद्र प्रसाद मंडल तक सीमित नहीं है। प्रदेश भर में ऐसे कई शिक्षकों की पहचान की जा रही है, जिनके शैक्षणिक प्रमाण पत्र और अंक-पत्र में गड़बड़ी पाई गई है। यदि कोई शिक्षक जाली दस्तावेज प्रस्तुत करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


बांसी थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर के अनुसार, इस मामले में शिक्षकों की नौकरी, सरकारी नियम और शिक्षा विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे फर्जीवाड़े से छात्रों की शिक्षा और विभाग की छवि पर गंभीर असर पड़ता है। इसलिए निगरानी विभाग लगातार प्रमाण पत्रों की जांच कर रहा है और किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामले शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ावा देने के लिए जरूरी हैं। फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई से नए शिक्षकों और छात्रों के बीच विश्वास कायम रहेगा।


इस घटना के बाद शिक्षा विभाग ने सभी प्रखंडों के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र के शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराएं। यदि कोई शिक्षक फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करता पाया गया, तो उसके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


निगरानी विभाग की इस कार्रवाई ने प्रदेश भर के शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है। विशेषकर उन शिक्षकों के लिए यह चेतावनी है जो फर्जी अंक-पत्र या प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे हैं। यह मामला यह साफ कर देता है कि शिक्षा में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है, और किसी भी तरह के फर्जीवाड़े को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


बहरहाल, गजेंद्र प्रसाद मंडल के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उसके बाद की कानूनी प्रक्रिया इस दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल बौंसी प्रखंड बल्कि पूरे बिहार में शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की सख्त जांच को मजबूती मिलेगी।