AURANGABAD: बिहार के औरंगाबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सिविल सर्जन कार्यालय के एक निलंबित क्लर्क को दो झोला सरकारी कागजात के साथ गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार क्लर्क की पहचान कृष्ण प्रसाद वर्मा के रूप में हुई है। आरोप है कि दशहरा की छुट्टी के दिन वह बिना अनुमति कार्यालय में दाखिल हुए और सरकारी दस्तावेजों को अपने साथ ले जाने की कोशिश कर रहे थे। हैरानी की बात यह है कि कृष्ण प्रसाद वर्मा पहले से ही दो जगह नौकरी करने और दोनों जगह से वेतन लेने के आरोप में निलंबित थे। अब कागजात से जुड़े इस नए मामले ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
मामला औरंगाबाद के सिविल सर्जन कार्यालय का है। जानकारी के मुताबिक, दशहरा की छुट्टी के दौरान निलंबित क्लर्क कृष्ण प्रसाद वर्मा कार्यालय में मौजूद थे। सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार के अनुसार, क्लर्क ने कार्यालय का दरवाजा अंदर से बंद कर रखा था। इसी दौरान उनके पास से दो झोला कागजात बरामद किए गए।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन ने कृष्ण प्रसाद वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। उन पर बिना अनुमति कार्यालय में प्रवेश करने, कागजात ले जाने और दस्तावेजों में छेड़छाड़ करने का आरोप है। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पहले भी दर्ज हो चुकी है प्राथमिकी
कृष्ण प्रसाद वर्मा पर इससे पहले भी धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। गोह पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने 10 अक्टूबर 2026 को उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि वह औरंगाबाद के सिविल सर्जन कार्यालय में क्लर्क के पद पर कार्यरत रहने के साथ-साथ गोह पीएचसी में भी नियमित रूप से काम कर रहे थे और दोनों जगह से वेतन ले रहे थे। इसी मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर उन्हें निलंबित किया गया था। गोह थाने में इस मामले में कांड संख्या 278/26 दर्ज है, जिसकी जांच जारी है।
अब कागजात की जांच पर टिकी नजर
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि दो झोला कागजात में आखिर कौन-कौन से दस्तावेज थे और उन्हें कार्यालय से बाहर ले जाने के पीछे क्या वजह थी। इन दस्तावेजों में किसी तरह की छेड़छाड़ हुई है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। निलंबित क्लर्क की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। अब जांच में ही खुलासा होगा कि बरामद कागजात का मामला क्या है और इस पूरे प्रकरण में किनकी जिम्मेदारी बनती है?