अररिया: बिहार के अररिया जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवती के साथ कथित दुष्कर्म की घटना के बाद न्याय दिलाने के बजाय पंचायत के नाम पर मामले को दबाने की कोशिश किए जाने का आरोप लगा है। हैरानी की बात यह है कि पीड़िता को इंसाफ दिलाने के बजाय कुछ जनप्रतिनिधियों और पूर्व जनप्रतिनिधियों पर रुपये लेकर मामला खत्म करने का दबाव बनाने का आरोप है। पीड़िता की बहन का दावा है कि पंचायत में एक लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक देने का प्रस्ताव रखा गया। यहां तक कि एक जनप्रतिनिधि ने कथित तौर पर एक लाख रुपये लेकर मामला खत्म करने की सलाह दी। हालांकि, जब दो दिनों तक चली पंचायत में बात नहीं बनी तो पीड़िता आखिरकार पुलिस के पास पहुंची। अब पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया है।

घर में अकेली थी युवती, तभी पहुंचा आरोपी

मामला अररिया जिले के रानीगंज थाना क्षेत्र के एक गांव का है। पीड़िता की बहन के मुताबिक, घटना एक नवंबर को दोपहर करीब दो बजे की है। उस समय युवती घर में मौजूद किराना दुकान पर थी। उसके पिता बाहर रहते हैं, जबकि मां गांव में मजदूरी करने गई हुई थी। घर में युवती अकेली थी और झाड़ू लगा रही थी।

इसी दौरान खरहट पंचायत के नंदकार गितवास निवासी दिनेश विश्वास (30) कथित तौर पर दुकान के रास्ते घर में दाखिल हुआ। पीड़िता की बहन का आरोप है कि युवक ने घर में घुसते ही युवती के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया और दरवाजा बंद कर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद आरोपी वहां से चला गया। कुछ देर बाद पीड़िता ने अपने परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। परिवार के सामने एक तरफ बेटी के साथ हुई इस कथित दरिंदगी का दर्द था तो दूसरी तरफ आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कराने की चुनौती।

इंसाफ की जगह पंचायत में लगने लगी रुपये की बोली!

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप घटना के बाद हुई पंचायत को लेकर सामने आया है। पीड़िता की बहन का कहना है कि घटना के बाद कुछ वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में दो दिनों तक पंचायत की गई। इस दौरान कथित तौर पर पीड़ित परिवार को रुपये देकर मामला खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश हुई। बहन के मुताबिक, पंचायत में एक लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक देने का प्रस्ताव रखा गया। आरोप है कि खरहट पंचायत के एक जनप्रतिनिधि ने पीड़ित परिवार से कहा कि एक लाख रुपये लेकर मामला खत्म कर लिया जाए।

सवाल यह है कि आखिर किसी गंभीर आपराधिक घटना के बाद पंचायत में समझौते की पेशकश करने का अधिकार किसने दे दिया? अगर पीड़िता के परिवार को रुपये का लालच देकर चुप कराने की कोशिश की गई, तो यह मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि पीड़ित को न्याय से दूर रखने की कोशिश पर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, पंचायत में शामिल लोगों की भूमिका और रुपये के प्रस्ताव से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

दो दिनों तक चली पंचायत, फिर थाने पहुंची पीड़िता

पीड़िता की बहन के अनुसार, दो दिनों तक पंचायत के जरिए मामले को निपटाने की कोशिश की गई। लेकिन जब कोई सहमति नहीं बनी तो परिवार ने पुलिस से शिकायत करने का फैसला लिया। इसके बाद मंगलवार को पीड़िता अपनी बहन के साथ रानीगंज थाने पहुंची और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।

परिवार का आरोप है कि अगर पंचायत में समझौते की कोशिश नहीं होती तो शायद पुलिस तक पहुंचने में इतनी देरी नहीं होती। अब परिवार को उम्मीद है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपी को कड़ी सजा दिलाने की दिशा में कार्रवाई करेगी।

आरोपी हिरासत में, पुलिस कर रही पूछताछ

मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी दिनेश विश्वास को हिरासत में ले लिया है। रानीगंज थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि आरोपी युवक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। उसे पकड़ लिया गया है। पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में अररिया भेजने की प्रक्रिया की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। साथ ही पंचायत में कथित तौर पर समझौते के लिए रुपये का प्रस्ताव देने के आरोपों की भी जांच की जरूरत है।

कई सवाल छोड़ गई यह घटना

अररिया की यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर किसी पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय उसे रुपये लेकर चुप रहने की सलाह क्यों दी गई? पंचायत में शामिल लोगों ने किस आधार पर मामले को निपटाने की कोशिश की? क्या पीड़ित परिवार पर किसी तरह का दबाव बनाया गया?

कानून के तहत दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध का फैसला पंचायत में रुपये के लेन-देन से नहीं हो सकता। ऐसे मामलों में पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया ही रास्ता है। अब देखना होगा कि पुलिस आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ समझौते के लिए दबाव बनाने के आरोपों की भी तह तक पहुंचती है या नहीं।